अनन्नास pinaaple

अनानास इसको संस्कृत में बहु नेत्र फलन कहा जाता है जब इसके फल के आकार को देखेंगे तो ऐसा पता चलेगा जैसे इसमें बहुत से नेत्र दिखाई देती है, दूसरा नाम बहु नेत्र (राजबलभ निघंटू) कहा जाता है। ऐसा कहा गया है जिसमें सब रसीले फल होते है यह भारत का फल नहीं है यह colambas (अमेरिका) का फल है, ऐसा कहा जाता है अनन्नास का छिलका निकाल का खाया जाता है।सर्वप्रथम गोवा में लगाया गया धीरे २भारत देश फैल गया ।लोगो ने इसको सराहा भी ,ये कही कही भी उग जाता है। जहा सुखा पड़ा है वहा पर भी उग जाता है,हमारे देश के वैध ,राज्य वैध इस फल का जलीय , कैंडी आचार, मुरब्बा,सब्जी, बनाना शुरू कर दिया। पके हुए फल ये कृमि नाशक भी है।

इसका गुण जो होता है स्निग्ध होता है।तथा गुरु गुण होता है गुरु गुण(देर से पचने वाला होता है)और स्निग्ध है तो कफ और पित्त ये दोनो को बढ़ाने वाला होता है आप लोगो को पता है ग्रीष्म ऋतु में कफ और पित्त बढ़ाना पड़ता है।क्युकी आग्नि मन्द रहता है ग्रीष्म ऋतु में ये जो अन्नानाश है ये स्निग्ध गुण लिए रहता है कफ को बढ़ाता है और पित्त को थोड़ी मात्रा में बढ़ाता है। परंतु वात का शमन(नाश) करता है! इसका विपाक रस मधु रस है ऐसा कहा जाता है मधु रस के साथ में अम्ल रस भी पाया जाता है इसका जो वीर्य शीत (तासीर)ठंडी है।ये वात पित्त कफ शमन (खतम)करता है ये भूख को बढ़ाता है और वायु का शमन कटा है पेट को अच्छी तरह साफ भी करता है। इसीलिए रोचन दीपन अनुलोमन का गया है। परंतु अधपका फल कृमि नाशक और शरीर में कही भी कीड़े हो मलद्वार ,यकृत, पेट, सिर में कीड़े हो अधपका (आधा कच्चा,आधा पक्का) को लेकर मिक्सी में पीसकर उसमें १चम्मज शहद मिलाकर देने खाली पेट देने कीड़े खत्म हो जाता है ये रक्त की गर्मी को शांत करता है, हृदय को बल देता है।ये गर्भावस्था जो गर्भवती महिला है उन्हे अन्नानास की सेवन नही करना चाहिए क्युकी ये गर्भ का स्राव कर देगा यानी गर्भपात कर देगा इसीलिए भूल से गर्भवती महिला को भूल से कभी नहीं सेवन करना चाहिए। जिनकी हावी ब्लीडिंग या रक्त प्रदर होती है तीन दिन कम से ६दिन होना चाहिए जब महावारी होती है यादिआधिक ३दिन से ज्यादा ६ अधिक होनेलगे तो उन्हे रक्त प्रदर खा जाता है।ये योनि व्याप्त योग चरक संहिता में चरक ने बताया है जिनको अधिक रक्त स्राव हो वो अन्नानश की सेवन न करे। जिनकी महावारी कम आती है वो अन्नानश के सेवन से महावारी आने लगता है जिनको रक्त पित्त है जिसे कान से खून ,मूत्र से खून , मलद्वार से खून आता हो उन लोगो को आनानश की सेवन नही करना चाहिए जिन्होंने रक्त दान किया हो या दुर्घटना हवा हो उन्हे१महीना तक सेवन नही करना चाहिए। जिनकी किडनी में स्टोन हो ये फल सेवन कर सकते है ये ज्वार नाशक है आनानश्श का सेवन कर सकते है मिसरी के साथ या sedhha नमक के साथ, सहद के साथ

प्रयोग

  • जिनको अरुचि होती है खाने की इच्छा नहीं होती है खाना खाने के बाद पेट में दर्द होता है जिनको हाइपरसिटी होता है या जिनकी ज्वांदिश होता है जिनका पेट साफ अच्छे से नही होता है कब्ज हो दिन दो से तीन बार एक कप की मात्रा में (५०एमएल) प्रयोग करना चाहिए धीरे धीरे सारे रोग दूर हो जाएंगे
  • जिनको हृदय रोग है उनकी सरबत बना के सेवन करना चाहिए और हृदय को बल देता है। पेसमेकर लगा हो उनके हृदय में दर्द होता है उन्हे सुबह सुबह नींबू पनिया नारियल पानी watermelon भी ले सकते है उन्हे सुबह नाश्ता नही करना चाहिए।
  • जिनको २से३महीने में महावारी आता है या महावारी आने से पेट के निचले भागो में दर्द या पूरे शरीर में दर्द होता हो योनि पथ में जलन होता है अन्नानास के रस को को मधु में मिलाकर कर सुबह शाम रात को पीने से ठीक हो जाता है
  • जिनको बुखार में प्यास लगती है कंठ सुख जाति है संताप होताहै या शरीर में जलन होती है जिनको दुर्बरत्ल है है दोपहर में सेवन करना चाहिए मधु के साथ

अनुभूत प्रयोग

  • जब हम खाली पेट में सेवन करते है तो देर में पचता है खाने के एक घंटे बाद सेवन करते है तो जल्दी से पच जाता है ये नेत्र की ज्योति को बढ़ाता है आलोचक पित्त का शमन करता है
  • आन्नांश के छोटे टुकड़े को कांच के गिलास में रखने से मधु के साथ मे सेवन करने कफ नाशक और पित्त नाशक होता है
  • कच्चा फल (अधपका से भी कम)खाने से गर्भ नष्ट हो जाता है फल का रस निकालते है चित्रक का जड़ होता है उसका जड़ का पाउडर १ग्राम के मात्रा में मिला दे लड़की के दोनो नाक को बंद करके खड़े होके पिलाने (खड़े होके पिलाने से आपन वायु पर काम करना मूत्र को निकालना रक्त को बाहर निकलना गर्भ को निकालना आदि )से एक घंटा खड़ा रहा रहना है उसके बाद ३ से ४ किलोमीटर दौड़ना एकदम से दौड़ना उसी दिन गर्भ नष्ट हो जाता है अम्ल का रस१ चम्माज अर्जुन का कड़ा४चम्माज पीने से १५ दिन से पीना चाहिए
  • जिनकी मास्तिक की बीमारी है जिनको कुछ याद नहीं रहता है क्या बोलते है उनको पता नही उन्हे रस देना चाहिए
  • जिनको ठंड ज्यादा लग रहा होता उनको पांडू रोग हवा हुवा है मधु के रस से सेवन करने ठीक हो जाता है
  • जिनको पेशाब नही होता है मधु के साथ सेवन करना चाहिए।
  • जिनको पेट साफ नही होता । पाचन क्रिया ठीक नही है उन्हे एक जाओ रस जीरा पावडर और सेंधा नमक मिलाकर पीने से ठीक हो जाता थाई
  • जिस बच्चो को दस्त नही नही होता है उन्हे आनाश का कच्चे फल को उबाल के उसके रस का सेवन कराने से ठीक हो जाता है
  • जिनको बेचनी और पेट साफ नही होता है भूख नही लगना पेट साफ नही होना सुबह सुबह खाली पेट अनन्नस का रस के मिसरी,या खांड के साथ में कलानामक मिलाकर देने से धीरे आराम हो जाता है
  • जिसको हिचकी होता है आधा कप पत्तो का रस और मिसरी मिलाकर देने से ठीक हो जाता है
  • कभी कभी चक्कर आना सिर दर्द होना अन्नानास के छोटे टुकड़े के मिसरी के टुकड़े के साथ में चूसने से भी आराम हो जाता है
  • भूख लगने पर थोड़ा सा खाने पर पर भर जाना अन्नामश छोटे छोटे टुकड़े कलाई मिर्च का पाउडर और कलानाम्क मिलाकर खाने से समस्या दूर होती
  • बवासीर का मस्सा आन्नान्श के जड़ को ले कर राख बनाने से। और सरसो के तेल में मिलाकर लगाने से ठीक हो जाता है
  • अधिक मात्रा में सेवन कर लेने से होने वाले प्रतिक्रिया से बचाव( एक गिलास अधिक गरम पानी में नींबू का रस और एक चम्म्ज अदरक कब एक चम्माज़ मिसरी का पाउडर मिलाने के बाद चाय के तरह पी लीजिए

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