कटहल

कटहल की भाव प्रकाश तथा सुश्रुत संहिता में इसका उल्लेख मिलता है जो जो ऋषियों ने बताया है भाव मिश्र ने बताय है

सस्कृत में कटहल फल क्या कहते है।

इसका संस्कृत में पनाश नाम क्यों पड़ा। ऐसा कहा जाता है इसकी स्वादिष्ट और पौष्टिक तत्व दोनों की समागम के प्रश्न के कारण जो प्रशंसा होती है इसके कारण इसको पनाश कहा गया है। हिंदी में कांतिका कहा जाता है जो चारों तरफ कांटे जैसे दिख रहा होता है इसलिए इसे पलाश भी जाता है इसके सेवन करने से शरीर का इतना गुरुर द्रव्य अथवा भारी आहार होता है अथवा पेट को भारी बना देता है शरीर को भारी बना देता है यानी मोटा बना देता है

कटहल(फल) का तासीर क्या है

कटहल का तासीर ठंडा होता है इसका गुण शीतल होता हैं स्निग्ध गुण है (आप लोग जानते है यदि किसी का वात पित्त बड़ा रहता है तो शरीर में रूखापन होता है) यदि कटहल का सेवन करते हैं तो रूखापन दूर होता है ( जैसे की जमीन पर कहीं पर सुखा हुआ उसमें पानी डालते तो गीला हो जाता है बस इतना ही फर्क है ) यह वाट पित्त का नाशक है इसके लिए इसीलिए यह सब को सेवन करना चाहिए।

कटहल(फल) के सेवन करने से वजन बढ़ता है

इसे संतपर्ण कारक भी कहते हैं यदि दुबला, पतला, मनुष्य यदि नियमित रूप से केवल ग्रीष्म ऋतु से बसंती ऋतु में इसका सेवन करें, तो उसका मोटापा बढ़ जाता है। मतलब उसका वजन बढ़ जाता है इसलिए पनाश (कटहल )का सेवन करना चाहिए।

क्या कटहल(फल) सातों धातुओं को बढ़ाता है ?

जो सातों धातु को बढ़ाता है उसे बृहण कहते हैं। इसमें बृहण गुण पाया जाता है ये तंत्र वृद्धि करने वाला है, मांस को बढ़ाने वाला है जिसे मांस तंत्र धातु छय हुआ हुआ हो या कम होता है उन लोगों को यह सेवन करना चाहिए। जिन लोगों को चाहिए कि उनका वात ना बड़े उनको पनाश का प्रयोग करना चाहिए ।क्योंकि बलदायक होता है यह बालविर्ध भी होता है और शुक्र जनक या शुक्रवर्धक भी होते हैं। ऐसा कहा जाता है रक्त पित्त को दूर करता है।आपके शरीर में कहीं से भी खून निकलता हो,जैसे आंख से खून निकलना, नाक से खून निकलना, गुदा द्वार से खून निकलना, मूत्र नाली से खून निकलना, मसूड़े से खून निकलना, यह सभी रक्त को शमन करने के लिए कटहल का ही प्रयोग करना चाहिए

यदि आपके रक्त में पित्त बढ़ गया होता रक्त त्वचा का रोग हो जाता है हो गया है तो दाद खाज खुजली आदि एग्जिमा सोरायसिस यह सब रोग हो जाता है कटहल का सेवन करने से नहीं होता है

कैसा भी घाव हो घाव ठीक होता ना हो तो कटहल का प्रयोग करने से घाव ठीक हो जाता है

कच्चा कटहल

जिनको वात का समस्या है। उनको कटहल नहीं खाना चाहिए आपके मल को बांधने वाला होता है जिससे पेट साफ नहीं होता है।

कटहल के बीजों का गुण

कटहल के बीजों को लकड़ी के आग में पकाकर ,उसका छिलका निकाल कर खाया जाता है। कटहल का बिज खाने से,शुक्र धातु को बढ़ाता है। जिसके मल बंध रहता है उसको नही खाना चाहिए

निषेध

  • जिनको ट्यूमर है,उनको नही खाना चाहिए
  • जिनको अग्नि मदग्नि है उसको सेवन नही करना चाहिए

प्रयोग और उपचार

  • किडनी के रोगों में जो सर्वांग शोध हो जाता है यानी की किडनी की सूजन हो जाता है, हाथो और पैरो में जहा जहा सूजन हो जाता है वहा पर दूध का लेप करने से आराम मिलता है
  • यदि आप रात में सोए रहते हैआप को कीड़े और जंतु ने दश लिया है।यदि वहा पर घाव बन गया है,ज्वार होने लगता है फिर दूसरी समस्या , चलने फिरने में में ये सिर दर्द होने लगता है। यदि ऐसा होने लगे तो कटहल के पत्तो को उबालकर सेवन करने सेशरीर का विष निकल जाता है विष का नाश होता है
  • यदि कोई व्यक्ति नशा करके लड़ाई और झगड़ा करता है तो समान तोड़ देता है।(शराब का नशा ,गंजा का नशा किसी भी प्रकार का नशा हो ) कटहल के पत्तो का रस सेवन करने से १०से ४५मिनट में नशा उतर जाता है
  • यदि किसी को पतला दस्त लगता है।कटहल के फूल को छाया में सुखाकर पावडर बना कर उसमे मटका का पानी या ताजा जल एक गिलास पानी में एक चम्मज़ पावडर मिलाकर पीने से पतले दस्त, उल्टी होने से सब दूर हो जाता है।
  • जो व्यक्ति स्वाथ्य हो चेहरा ढीला ढाला और आंखे धसी हुई हो फल धसे होने , स्मार्ट दिखने के लिए कटहल के सब्जी का नियमित सेवन करने से सभी समस्या दूर होबजाता है।
  • यदि किसी व्यक्ति को बुखार होता है बिज का कड़ा बना कर पीने से ठीक हो जाता है
  • जो हृदय रोगी है उनको खाने की इच्छा नमकीन बादाम, खाजू खाने की इच्छा होती है ये सब खाने से रूखापन होता है ये रूखापन होने से हृदय को तकलीफ होता है। बीजों का सेवन करने से इसे रोगियों को सेवन करने से हृदय रोगियों में आराम मिलता है।
  • यदि पेट मरोधकर साथ में बवासीर के जैसा जलन हो वाहा पर कटहल के झाल उबालकर मधु के साथ पीने से आराम हो जाता है।
  • यदि किसी को भूख नहीं लगती है कटहल के पत्तो का रस या झाल का कड़ा या झाल के कड़ा के साथ ,दो तोला काली का पावडर,चुटकी भर मिलाकर पीने से सुबह खाली पेट सेवन करने भूख लगने लगती है।
  • यदि कभी कभी हड्डियां में दर्द होने लगे तो कटहल के बीजों का कड़ा बना कर पीने से आराम मिलता है
  • कभी कभी हमारे शरीर में दर्द होता है। तिल का तेल १०० ग्राम,नारियल का तेल १०० ग्राम कटहल के छाल२००ग्राम मिला लिजाए धीमे धीमे आंच में पकाए जब फेन निकलना बंद हो जाएगा झान कर ठंडा होने होने के बाद भीम सैनी कपूर१०ग्राम उसमे मिलाकर के रख दीजिए, ये तेल आपके शरीर में कही भी दर्द हो ये दर्द नाशक का काम करता है
  • यदि आपको बिच्छू ने काट लिया है कटहल के पत्तों का रस लगाने से दर्द दूर होता है।

इसमें लिखा हुआ जानकारी के उद्देश्य से लिखा है प्रयोग करने से पहले आपने नजदीकी डॉक्टर और आयुर्वेदचार्य से राय अवश्य ले , किसी को कोई नुकसान होने पर पर वेबसाइट की कोई जिम्मेदारी नहीं है

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