खजूर (date)

खजूर (डेट) को आप सभी जानते है और खाते

भी है आज हम खजूर के बारे में बात करेंगे ( वैद्यमित्र आयुर्वेदाचार्य श्री सत्यवान नायक जी) आयुर्वेद के जनक और गुरुदेव के चरणों में प्रणाम करता हु। खजूर को सभी लोग सेवन करते है और सब को पता है। परंतु आयुर्वेद के ग्रंथो के आधार पर, और ऋषि मुनियों के आधार पर ,या जो फिर वैद्य लोग, या वैद्य गण ,और किस किस रोगों में किस प्रकार प्रयोग किया जाना चाहिए।

खजूर क्या है

चरक संहिता में खजूर को दो प्रकार के बताया गया है सुश्रुत संहिता, में महर्षि सुश्रुत ने दो प्रकार बताया है परंतु महर्षि अपने निघंतू में तीन प्रकार का खजूर बताया है भावमिश्र के समय में तीन प्रकार का बताया है तीसरे प्रकार का खजूर को छुआरा बोलते है (वैध जी अनुमान है) सभी ग्रंथो में दो प्रकार का खजूर बताया गया है ।(राज निघंटू,चरक संहिता , सुश्रुत संहिता) तीसरे प्रकार का है उसे छुआरा (उर्दू में ) कहते है दो प्रकार के खजूर का नाम है जिनको भूमि खजूर ,और पिंड खजूर, कहते है। चरक ने भी और सुश्रुत ने भी। भूमि काजूरिका और पिंड खजूरिका की क्या है उसके विषय में जानेंगे।

भूमि खजुरिका

भूमि खजूरिया को खिद्र खाजुर खा गया है इसका नामकरण क्यू हुआ है(जिसका फल,जिसका जड़ जिसका रस जिसका गुड आदि सेवन करने से हमारे शरीर में जितने प्रकार की धातुएं के छय (कम हो जाने। छय कहा जाता है ) को हो जाने,रक्त का छय हो जाना मांस का छय हो जाना मेढ़ धातु का छय हो जाना अस्थि धातु का छय हो जाना वजन का कम हो जाना जिनका बल का छय हो जाना रक्त में हिमोग्लोविन का कम हो जाना हड्डियां कमजोर हो जाना दांत के रोग में, आपके शरीर को कोई भी छय(कम हो जाना )सभी छय रोगों में काम करता है। भूमि खजूर में छोटे छोटे पेड़ो में फल आने लगते है भूमि खजूर का रस मधु और कसाय दोनो होते है इसका विपकय रस मधु होता है

पिंड खजुर

पिंड खजूर बड़े बड़े पेड़ होने पर फल आते है जिन्हे हम पिंड खजूर कहते है। पिंड खजूर में केवल मधु रस ही पाए जाते इसका विपकी रस मधु होता है

खजुर का गुण धर्म रस और वीर्य ,विपक्य के बारे मे

चरक और सुश्रुत में आदि ग्रंथो ऐसा कहा गया है । खजूर में स्निग्ध गुण रहता है। स्निग्घ(जो कफ को बढ़ाता है) जो सहायक कफ को बढ़ाता है।और ऐसा कहा जाता है ये गुरु है गुरु होने से शरीर के वजन को बढ़ाता है मांस को बढ़ाता है अस्थि ,धातु आदि। रस में देखेंगे तो मधु रस और कषाय रस भी है खजूर का विपक्य रस मधु रस होता है इनका जो वीर्य है शीत वीर्य है वात पित्त दोष को शमन करता है। यदि अधिक मात्रा में कफ है या दूषित कफ है तो फिर भी सेवन करना चाहिए यदि वात पित्त बढ़ा हो तभी भी सेवन करना चाहिए। वे ऐसा कहा गया शरीर में कही भी दर्द हो इसका जड़ लेके आए, जड़ को पानी में पीसकर के लेप लगाने से ही जहा दर्द होता है वो दर्द ही दूर हो जाता है क्युकी वात शमन है पीढ़ा शमन है जिन जिन लोगो का नाडी दुर्बल होता है। नाडी का पकड़ ना आए तो खजूर का रस या खजूर का गुड खजूर का प्रयोग करना चाहिए इससे नाडी को बल मिलता है। और नाडी पकड़ में आता है। और ऐसा कहा जाता है खजूर का रस सेवन करने से मस्तिका को बल देता है। उन्हे मस्तिक का कोई रोग होता नही है। खजूर खाने से बीपी कभी नहीं होता है पैरालिसिस कभी नही होता है hart attack kabhi भी नही आता है। कभी कभी बोलते है मेरे हाथ पैर कंपन हो रहे है काजूर का ताड़ी या रस का सेवन से कंपन धीरे से समाप्त हो जाता है। जिसके कंधे में दर्द हो रीढ़ की हड्डी में दर्द हो सेवन करने से समाप्त हो जाता है कौवा का प्रिय फल है। जिसको स्वावलंबी बनाना है खजूर का सेवन करना चाहिए।वात पित्त को शमन करता है पाचन संस्थान में ये क्या क्या काम करता है जिन जिन लोगो का कलेजा कफ घट गया है या फिर बढ़ गया है इसके लिए खजूर का सेवन करना चाहिए। क्युकी ये स्नेहन गुण और अनुलोमान गुण होता है जिनको भोजन करने के बाद दस्त लगता है उन लोगो को खालीपेट में सेवन करना चाहिए अधिक खाने से आपके मल को अवरोध कर देता है कब्ज बना देता है। इसका जो पत्र है भैज्यरत्नवाली आयुर्वेदिक पुस्तक है कृमि रोग के ११अध्याय में ६ श्लोक में लिखा है खजूर का पत्ता लाइए २५ग्राम ,दो गिलास पानी में उबालिए आधा गिलास बचे तो उसको छान के रातभर के लिए छोड़ दीजिए(dakh कर रखना है) सुबह में एक चममज शहद मिलाकर देना है चाहे बच्चे हो बूढ़े हो या कोई भी हो आप उनकी सेवन करने के लिए दीजिए जिन बच्चो को बार बार कृमि होता है पूरी तरह खत्म कर देता है परंतु दो से तीन महीना प्रयोग करना चाहिए। मतलब जब तक आप जिएंगे तब तक आप कृमि नही होगा आपके शरीर में कही भी रक्त अवसाद होता है नाक से आंख से रक्त प्रदर ,मल द्वार से शरीर में कही से भी होता है खजूर क सेवन करने से से ठीक हो जाता है मैथुन शक्ति को बढ़ाने वाला है। मूत्र रोग में अच्छा काम करता है। पेशाब रूक गया है पेशाब में जलन है ज्वार नाशक है सभी प्रकार के ज्वार नाशक है। शरीर में दाह है जलन हो दाह को शमन करता है जिसको थकान लगता है प्रतिदिन जो काम करते है उनके के लिए लाभदायक है दीपन है जिनको दांत दर्द होता है खजूर का जड़ खोद के लाए उसको उबाल एक एक घंटे में कुल्ला करे आप देखें आप के दांत दर्द ठीक हो जाए या जड़ को धूप सुखाकर पावडर से मंजन करने से दांत दर्द दूर होबजाता है ( तर्जनी उंगली ) जिनको को बार चक्कर आता है जिनको बार कमर में दर्द होता है खजूर शिरा बहुत अच्छा काम करता है https://youtu.be/PNKah-Wv0Fo?si=rlmGGCBSUZcY5Wz

प्रयोग

  • जिनको रक्त कमी हो या हिमोग्लोबिन की कमी हो या मांस पेशियां दुर्बल हो और शरीर में दर्द हो सिर में चक्कर हो इसके लिए सबसे पहले ४खजूर ले रात के सोते टाइम में गुनगुने में डाल छोड़ दे सुबह सर्वोदय के पहले छुआरा को मसल कर पी लेना है ,/अगर सर्वोदय के बाद दूध नष्ट हो जाता है ) केवल 10 दिन में आप देखेंगे हिमोग्लिब बढ़ जाएगा ।
  • जो मजदूर होते है वे शाम को थक जाते है वे शराब का सहारा लेते है सोते टाइम चार खजूर चबा चबा के खा लेना है उप्पर से केवल दूध पी लेना है सुबह उठने के बाद स्फूर्ति आ जाता है
  • जिनको बार यूरिन का इन्फेक्शन होता है बच्चो को 2 और बड़ों 4खजूर उबले जब तक,( पानी या दूध) उबाले जब तक दूध में मिल न जाएं और छान ले धीरे धीरे पिए
  • जिनको parassis हो जाता है खजूर का कड़ा पीने से आयुर्वेदिक पीने 100गुना बड़ा देता है
  • जिनको कामवासना कमा हो गया हो सेक्सुअल प्रोब्लम काम हो गुनगुना दूध उबाल के चार खजूर के खाकर दूध को पीना है ,(खड़े होके पीना चाहिए)
  • कभी पूरे शरीर में जलन होता है आंख में जलन पारो में जलन खजूर खाके मिट्टी मटके के पानी का जल पीना चाहिए
  • कभी कभी खासी, दमा का शिकायत हो कांच का बॉटल ले ४खजूर बीज निकाल ले और बॉटल में डाल दे और उसमे मधु डाल दे शहद में डब जाए १० से १२ घंटे उसके बाद एक खजूर को धीरे धीरे चूसते चूसते चाहिए
  • जिनकी भोजन पचता नहीं है जिनका पेट कड़क था खाना खाने के बाद में दो खजूर चबाकर कर खाना चाहिए ५से१० मिनट में १कप गरम पानी पीना चाहिए
  • जिनको पेशाब रूक जाता है खजूर के बीज को गिसकर पीने से धीरे धीरे आने लगता है
  • पेशाब ने जलन होता है और पेशाब पीला कलर का आता है खजूर के कड़ा में धागे वाला मिसरी मिलाकर वो पूरी तरह से ठीक हो जाता है
  • जिनकी दांतो मे दर्द होता इनके जड़ों को उबाल करके के कुल्ला करने ठीक हो जाता है ।
  • खांसी में खजूरादी घृत एक चममज खाने से ठीक हो जाता है
  • शरीर में रक्त निकलता है खजूर के फल को मधु के रस के मिलाकर पीने रक्त निकलना बंद हो जाता है
  • कभी कभी दिखना बंद हो जाता है या आंख के साइड में सफेद आता है खजूर के बीज को पीस लेना है अपने आंखों में अंजन की तरह लगाना है
  • कभी कभी जोर से दस्त लगता है दूध में खजूर पकाने से खाने से ठीक हो जाता है
  • जिनको यकृत ने सूजन हो गया है और बढ़ गया हा एक गिलास पानी में ५खजूर को उबाले पानी में उबालना है जब आधा गिलास बचे छान लीजिए उसने mahamajattadi यादी कड़ा आता है कम से कम ५०एमएल का कड़ा मिलाकर के उसको पीना है सुबह दोपहर शाम १५ दिन १०० आराम मिलता है
  • जिनको बहु मूत्र होता है खजूर के पत्तो को पीस की निचोड़ कर उसमे मिसरी मिलाकर पीने से आराम हो जाता है
  • स्वंpn दोष हो खजूर का कंद ले कंद का रस रसायन काल में मिसरी के साथ में पीना चाहिए
  • बचो के शरीर में कुछ लगता नही है इसके कंद को सर्वोदय के पहले पीना चाहिए
  • रसायन में खजूर का ताड़ी को पीने से सिर दर्द आराम हो जाता है
  • दादा खाज ने कच्चा खजूर में का रस पीने से आराम आता है
  • दांतो में कीड़े लग जाते है यदि दांतो को निकल देते है किसी भी शनिवार को खजूर के जड़ को लाना है ताबीज में भरकर गले में लटका दीजिए जिनको दांत में कीड़े हो वो छू मंतर हो जायेगा

नुकसान

  • अधिक खाने से कब्ज हो जाता है

प्रश्नोत्तरी

  1. प्रश्न :क्या खजूर गंभीर रोग में प्रयोग हो सकता है
  2. उत्तर ,शरीर में कोई भी रोग हो मटके का पानी में ५ खजूर को मसल कर सभी पीने से आराम होता है

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