स्वास्थ्य के लिए कच्चा खाएं

वह क्षण मानव समाज के लिए सचमुच बड़ा अशुभ हो, जिस पृथ्वी अग्नि का आविष्कार हुआ है। क्योंकि मनुष्य ने अपने सभी खाद्य सामग्रियों को आग के संसर्ग पकाकर और उन्हें तत्वहीन बनाकर भोजन के रूप में लेना प्रारंभ किया ।अन्यथा अग्नि आविष्कार के ,पहले जितने भी सभी प्रकार के खाद्य पदार्थ होते थे ।वह सीधे भोजन के रूप में प्रयोग किए जाते थे। जैसे जैसे पेड़ पौधे के माध्यम से उपजाया हुआ वास्तु सीधे भोजन के रूप में लिया जाता था। और शत-शत उसका लाभ लेते थे।

खाने का वास्तविक मंतव्य

खाने का वास्तविक मंतव्य क्या है। यदि हम इसका उत्तर जान जाए तो तो इस समस्या को सुलझाना और उसके साधन को सभी स्वीकार में हमें बड़ी सुविधा होगी।

जैसे कि जीने के लिए खाना , शरीर के लिए पोषक के लिए खाना, स्वास्थ्य के लिए खाना, और दीर्घायु बनाए रखने के लिए खाना।

इस बात को कौन इनकार कर सकता है विकास, प्रजनन, अस्तित्व, तीनों के लिए पोषक पर ही निर्भर होते हैं। कुछ लोगों का मत है। अधिक खाने से अधिक पोषक तत्व मिलते हैं लेकिन जबकि यह गलत है। हमारी भोजन ऐसी होनी चाहिए शरीर के लिए आवश्यक तत्व सुलभ हो सके। ऐसा न होने पर शरीर के आंतरिक व्यवस्था को अस्त-व्यस्त हो सकती है। और वह रोगी और जज्जर भी हो सकता है। वह समय से पहले नष्ट भी हो सकता है।

कच्चा क्यों खाना चाहिए

जब हम खुद पर विचार करते हैं या खुद से प्रश्न पूछते हैं। ऐसा कौन सा भोजन है जिससे शरीर के लिए सारे आवश्यक तत्व सुलभ है, तो हमें जवाब मिलता है । कच्चा भोजन प्राकृतिक भोजन ही है ।स्वास्थ्य विशेषज या सिद्धांत प्रतिपादन किया है ।मनुष्य वन्य जीव की भांति, सर्वोत्तम भोजन केवल साग सब्जी फल आदि जिन्हें हम कच्चे में खा सकते है। और कच्ची खाई जा सकने वाली वस्तुओं को आज के संसर्ग में पकाकर ना खाया जाए। यदि इन्हें हम पका कर खाते हैं तो हमारे उनके मूल तत्व का नाश होता है। और हमारी पाचन क्रिया की निर्बल बना देती है। भोजन के मंतव्य सिद्ध के लिए प्राकृतिक में निहित जीवन शक्ति को सबल बनाने के लिए हमें खोज करना चाहिए और उनसे लाभ उठाना चाहिए। बढ़िया से बढ़िया खाद्य पदार्थ है। जिन्हें अपने और अपने परिवार के लोगों के काम में लाना चाहिए जो केवल प्राकृतिक रूप से शुद्ध रूप में प्राप्त होते हैं। प्राकृतिक सर्वोत्तम आहार उत्पादन करती है। जिसे हम बलवान और रोग निवारक शक्तियां प्रकृति भोजन से प्राप्त होती है। मानव स्वास्थ्य के लिए एवं शारीरिक मानसिक और आत्मिक विकास विकास के लिए, खनिज लवण एवं उच्च स्तर से पोषक तत्व,साग सब्जियों फलों और अन्न में पाए जाते हैं। जब हम इन्हें बिना पकाए खाया जाता है तो हमें बीमार होने से बाचाते हैं साथ में सच्चीखुशी और जीवन शक्ति बढ़ाता है। जिससे मनुष्य उत्तम बलिष्ठ एवं दीर्घ जीवी संतान उत्पत्ति करने की समर्थ होताहै । संसार में आदिम जातियां कोई अपने जीवन में साग सब्जियां जड़ फल आदि अपने दातों से खाते थे।। ग्राहम कच्चे फलों का सिद्धांत का सबसे बड़ा प्रवर्तक था।

  • कच्चे भोजन को खूब चबाकर और निकालने की आवश्यकता होती है जिससे दांतों का व्यायाम भी हो जाता है।
  • आवश्यक चबाने से मुंह की लार के द्वारा भोजन का मिलना भी जरूरी होता है।
  • गरमा गरम भोजन करने से दांतों और पेट को नुकसान होता है जबकि कच्चा भोजन करने से कोई नुकसान नहीं होता है।
  • एक ही समय एक ही खाद्य खाने से जिससे पाचन क्रिया पचा देती है।
  • भोजन को स्वाद लेते हुए उन्हें चबा चबाकर खाने से अति भोजन लेने की निजात मिल जाती है।

कच्चा भोजन खाना कहां तक व्यावहारिक है

मिल्टन कहते हैं कि साग सब्जी मेवा आदि सब प्राकृतिक भोजन जिन्हें हम खाये जा सकते हैं। बाकी भोजन को तो हम आप्रकृति भोजन कहते हैं।

कच्चा क्या-क्या खाया जा सकता है

फल साग सब्जियां आदि कच्चे खा सकते हैं फर्जी ने आसानी से नहीं पचता है वह थोड़े-थोड़े मात्रा में चबा चबाकर को खाएं धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाते जाएं सभी खाद्य पदार्थ जिन्हें ऋतु अनुसार खाया जा सकते हैं जैसे हरी मटर हर गेहूं हरा जौ हरा भुट्ठा आदि

कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ है जिन्हें हमें सूखे हुए पदार्थ को पे कुछ समय के लिए पानी में भिगोकर उन्हें अनुकूरित करके बड़े मजे से खा जा सकते हैं जैसे चना मटर गेहूं मूंग उड़द आदि

बहुत ही साग सब्जियां भी कच्ची खाई जा सकते हैं जैसे की से पलक सेम गाजर ककड़ी मूली फल आदि कच्चा खाने का अभ्यास बढ़ाने के लिए अपने भोजन के थाली में एक प्लेट कच्चे सलाद की आदत लगानी चाहिए।

सलाद

परंतु प्राकृतिक चिकित्सा जी सलाद की व्यवहार में करतेऔर कराते हैं। अपितु बनाने और खिलाने में यह मंतव्य निहित होता है कि खाद्य वस्तुएं जो कच्ची हो वह प्राकृतिक अवस्था में खाई जा सकती है इसी प्रकार खा जाए जो सत प्रतिसत लाभ हो। इस तरह भोजन करने का जो तात्पर्य हो, वह पूरा हो

सलाद में प्रयोग होने वाले खाद्य

  • कोई खाद्य पदार्थ जिन्हें कच्चे और बड़े मजे से खा जाते हैं बहुत से लोग इन्हें खाते भी हैं जैसे आम पपीता खीरा ककड़ी गाजर आदि
  • पदार्थ हमें सुखी अवस्था में खाये जाते हैं किशमिश मुनक्का आदि
  • वे साग पात जो कच्चे खाए जाए है जैसे चने का साग,बथुआ का साग, पालक का साग आदि।
  • चटनी बनाकर खाने वाले आर्धशुष्क पदार्थ जैसे धनिया पुदीना इमली आदि

एक बार कच्चे आहार आ जाने के बाद पाचन क्रिया धीरे-धीरे सुधारने लगती है। कच्चा आहार शरीर के लिए प्राकृतिक आहार होता है। मनुष्य के मानसिक और बौद्धिक शक्तियों का सही ढंग से विकास होता है।

सलाद के पूरक

सलाद वही होता जो ताजी और हरी, कच्ची साग सब्जियों मेल से तैयार होता है। सलाद बनाने के लिए चार चीजों की आवश्यकता होती है। नमक शहद दही नींबू और भी कई प्रकार की चीज जो हम सलाद के रूप में ले सकते हैं और और उनकी गुणवत्ता बढ़ जाती है यदि सलाद नमक डालकर खा रहे हैं हमें जितना नमक की जरूरत होती है प्राकृतिक हमें सलाद में रहता है यदि बिना नमक डालें सलाद का प्रयोग करते हैं तो हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा रहेगा

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