Bhajak pitt ayurved jankarkari.भाजक पित्त जानकारी

भाजक पित्त के चर्म के ऊपर नहीं होता ।परंतु पवित्र के आधार पर होती है। जहां-जहां पवित्रता होती। वहां पर भाजक पित्त सही है जहां-जहां भाजक पित्त सही नहीं ,वहां पर आप पवित्रता है ।जिसे हम भाजक पित्त विकृत हुआ है

भस्माना शुद्धते कांसा

जैसे कि चूल्हे के राख से भस्म से कांसा के धो लेने से साफ हो जाता है

ताम्र शुद्धत अमल

आप ताम्र के बर्तन को नींबू के रस पानी में डाल के भिगोदेने से एक पहर रखने से साफ हो जाता है ।किसी की खट्टे ,(इमली दही नींबू)आदि।

रजा सात शुद्धते नारी

28दिन 6 घंटे बीतने के बाद ,यदि स्त्री का मासिक धर्म आनी चाहिए ।समझ लेना चाहिए स्वास्थ्य है। यदि पहले आता है ।समझ लेना पित्त बड़ा है ।यदि बाद में आता है समझ लेना वात रोग बड़ा है ।यदि उसी दिन आता है तो थोड़ा लेट आता है समझ लेना चाहिए उसका कफ बड़ा है इसका लक्षण है

वारी वैगन शुद्धते

वारी अर्थात नदी जितने सारे नदी हैं। अगर उसमें वेग नहीं है, तो उसे नदी का जल न पीने योग्य है ना नहाने योग्य है। परंतु जो लोग उसे नदी में नहाते हैं तो किसी न किसी रोग से पीड़ित हो जाते हैं। तुरंत ध्यान रहे, वर्षा ऋतु सवनवा, भाद्यपद्य के महीने ,में नदी के जल से ना पीना चाहिए ।ना नहाना चाहिए ।क्योंकि वर्ष भर पर नदी के दो किनारो पर बहुत सारा गंदगी जमा हो जाता है।

गर्भवस्था में होने वाले रोग

आजकल गर्भवती महिलाओं में ऐसे रिपोर्ट आ रहे है। आज एक रिपोर्ट आया जिसमें डॉक्टर ने उनसे पूछा आप शराब पीते हो क्या। हमने आज तक शराब पी ही नहीं और हाथ भी नहीं लगे डॉक्टर ने बताया आपकी रिपोर्ट में शराब आया है फिर महिला ने अपने पति को बुलाया और डॉक्टर के पास गई डॉक्टर ने बताया उनके पेट में शराब है

रिपोर्ट लेकर दूसरे डॉक्टर के पास गए सभी के शरीर में अल्कोहल होता है किसी के शरीर में ज्यादा तो किसी के शरीर में कम होता है इसमें घबराने की कोई जरूरत नहीं है । वह हमारे गुरु आयुर्वेदाचार्य वैध सत्यवान से मिले इसको आयुर्वेदिक की दृष्टि से देखोगे तो भैज्य रत्नावली ग्रंथ में इसके विषय में विस्तार से बताया गया है ऐसा लिखा हुआ है जब गर्भावस्था में शिशु जब गर्भाशय में ऐसा कुछ दिखे तो मतलब कोई विकृत दिखे ।तथा वस्तु नजर आए मतलब अनुभव होने लगे कि यदि कोई मादक द्रव्य जैसा लगे या मदहोश जैसा अनुभव तो समझ लेना। गर्भाशय में रहने वाले शिशु में पोषण में कमी आ सकती है या पोशाक की शक्ति बढ़ाने के लिए भाजस्य रत्नावली में एक बहुत बढ़िया उपाय बताया गया है

Bacchi ke phoshak shakti badhane hetu.बच्ची के पोषक शक्ति बढ़ाने हेतु

यस्थिमाधुर १तोला,(मुलेठी का पावडर),गंभारी का छाल २तोला ताजा ले (अगर सुखा लेते है तो एक पहर(घंटा) या भिगोना पड़ेगा।उसमे मिश्री ३तोला और पानी १६तोला (२००एमएल) ले। इतना उबाले आधा रह जाए तो।छान कर ठंडा होने तक पीला देना है।जिनका गर्भस्थ शिशु की पोषण की कमी हो या सोनोग्राफी में अल्कोहल की मात्रा ज्यादा हो उनके लिए ये राम बाण है

Ladka hoga ya ladki kaise pata kare .लड़का होगा या लड़की कैसे पता करे

जब गर्भ का नवा महीना चल रहा हो। या दसवां महीना चल रहा है। तो जब किसी लड़की की जन्म होने वाला होता है ।तो नवे महीने में हो जाता है ।जब किसी लड़के का जन्म होने वाला है तो दसवां महीने में हो जाता है आ।युर्वेद सूत्र के आधार पर कहा जाता है ।जब आप मासिक धर्म होता है उसी दिन से प्रसव के दिन तक गिनती करने से जब 10 मा हो जाता ,तो समझ लेना आपकी गर्भ में लड़का है। यदि आप अंतिम मासिक धर्म से लेकर प्रशव्व तक लेकर यदि 9 महीना होता है तो समझ लेना कि गर्भ में लड़की है। परंतु इसलिए नहीं बताया जा रहा है ।कि आप गर्भपात करा ले इसलिए किसी को जिनमें तीन लड़की हो हो सके या तीन लड़के हैं परंतु आपका पहली संतान है तो आप पहले संतान भी गर्भपात करा ले या दोष लगते हैं आत्मघाती ब्रह्मा घाटी दोष लगता है।

prashav ke najdik ke samay प्रसव के नजदीक के समय

यदि 10वीं या नवे महीने में प्रसव का समय आने लगे। 2 ग्राम सौठ लेना है मुलेठी 2 ग्राम लेना है देवदारू 2 ग्राम लेना है एक गिलास दूध तथा तथा आधा गिलास पानी में उबालना है उसको आधा गिलास पानी जल जाए तो एक गिलास बचे तो पीने के लिए देना है प्रतिदिन सुबह एक बार कम से कम 10 दिन देना चाहिए 10 दिन से 15 दिन देना चाहिए उसका अपान वायु विकृत नहीं होगा गर्भवती महिलाओं के लिए अच्छा हैं

गर्भवती महिलाओं के उल्टी,garbhvati mahilao ke ulti

गर्भवती महिलाओं को पहले या दूसरे महीने में उल्टी बहुत आती है परंतु तीसरे महीने में बंद हो जाती है इसलिए हुआ इनके उड़ने वाली में परिवर्तन आया केलेश का में परिवर्तन आया प्राण और भाजक पित्त में परिवर्तन हुआ है भैजस्य रत्नावली में इसका एक सरल उपाय बताया गया है एक तोला वाला पाउडर एक तोला मुनक्का बीज निकाल कर लेना है उसमें दो तोला मिश्री मिलाकर लेना है थोड़ा पानी डालकर कलर करना है 40 से 45 मिनट पीसना है आपस में गोंड जैसा हो जाता है तो यानी आपस में चिपकने लगता है जंगली बेर के भांति गोली बना लेना धूप में सुखा ले और रख दें

किसी को हिचकी आती है सीने में जलन होती है गले में जलन होती है मुंह में खट्टा पानी आता है मन में बेचैनी रहती है दिन में तीन से चार-पांच गोली लेना है। एक गोली मुंह में रखने के बाद चूसने के बाद एक घंटा के बाद फिर से एक गोली चूसना है। केवल दो से तीन दिन में ही गर्भावस्था स्त्री जो है उसकी उल्टी बंद हो जाती और भूख अच्छी से लगती है ।खाने की इच्छा भी होती है और हीमोग्लोबिन भी बढ़ जाता है ।दूसरे से तीसरे महीने तक चूसने से कोई नुकसान नहीं होता है

Bhajak Pitt ke ayurved ke anusar.भजक पित्त के आयुर्वेद के अनुसार

भाजक पित्त का मुख्य स्थान और इसका काम क्या है पसीना निकलना और ठीक उसी प्रकार हमारा शरीर में जो रस होता है आजकल अंग्रेजी भाषा में उसे प्लाज्मा बोलते हैं जिसको ब्रेन ट्यूमर ज्यादा हो रहा है लिपोमा लाइकोमा बोलते है रक्त के जितने सारे विकार होते हैं भाजक पित्त विकृत होने के कारण होते हैं किसी किसी ब्ब्लड कैंसर हो गया है

चरक संहिता में चरक जी ऐसा कहां है जिनका भाजक पित्त विकृत हो गया है नाड़ी से लेकर सीना तक वह सारे अंग पहले समान आयु को इसके बाद अपनवयु वाले को विकृति करता है धीरे-धीरे ब्यान वायु को विकृति कर लेता है

जिसके कारण शरीर में घमोरियां होने लगती है या लीवर सोरायसिस होने लगती है शरीर में दाद खुजली या शरीर में सफेद दाग कोई ना कोई इंफेक्शन होने लगता है या तो पूरे शरीर में दर्द बना रहता है ठीक नहीं होता है । स्त्री में जो गुड़ा भाग के ऊपर और नाही के नीचे जो श्रेणी होता है वहां पर जो भी विकृत होता है वहां पर भाजक पित्त का ही काम होता है पका से और आमाशय के बीच में जो विकृत होता है

गर्भपात बार बार होना।garb paat bar hona

सिद्ध योग, जब दूसरा महीना चलता है तो गर्भस्राव हो जाता है।फलाशी का वृक्ष का (सफेद,पीला,गुलाबी) जो मिल सके जब पता चले पहला महीना चल रहा है ।पहला महीना में एक पत्र लेना २५०जल के २५०दूध लेना।पात्र को कैंची से कटकर पकाना (बारीक करके) जब केवल दूध बचे तो उसमे मिश्री या भूरा डाल के देना सुबह खाली पेट जैसे जैसे दूसरा महीना आया तो २ पत्ते लेना तीसरा महीना आया ३ पत्ते लेने है महीने के हिसाब से पत्ते बढ़ाते जाना जब ५पात्र लेने लगे तो ५०० एमएल दूध और ५००पानी लेना है दस महीने तक पीने से गर्बस्राव नही होता है

सिद्ध योग २

बाबुल की ताजा छाल दो तोला लेना दो गिलास पानी में उबालना है उबलते उबलते जब आधा पानी रह जाए तो एक चम्मच मिश्री या भूरा खांड मिलाकर सुबह शाम खाली पेट एक सप्ताह खाली पेट लेना है आपको हर महीने में सुबह शाम एक सप्ताह लेना है पीने के बाद 1 घंटे कुछ ना खाना ना कुछ पीनाहै।

सिद्ध योग जो गूलर का का पेड़ है दो तोला ताजा चल लेना है दो गिलास पानी में उबालकर ना है जब आधा रह जाए तो उसमें मिश्री मिलाकर पीना है हर महीने में एक सप्ताह तक प्रयोग करना चाहिए

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