Ola ka ayurvedic Upyog ||ओला की आयुर्वेदिक दृष्टि। 21 सदी के उपाय।

सर्वप्रथम श्री भगवान जी के चरणों में नमन करता हूं। Ola ka ayurvedic Upyog कैसे करें। ओला से रोग उपचार, हमारे हमारे जीवन के लिए कितना महत्वपूर्ण है। आज हम इसके बारे में जानेंगे। पूरी जानकारी लिखी गई हैआप पढ़े।

Ola ka ayurvedic Upyog

Ola ka ayurvedic Upyog ओला का प्रयोग:-

किसी व्यक्ति के शरीर में कैल्शियम की कमी हो यह दुर्बल हो एक्सीडेंट हुआ हो हाथ में मुंह में कहीं पर भी यदि आपको फैक्चर हुआ है वहां पर सरिया यानी सलाई लगा दिया गया है कुछ दिनों बाद जुड़ा नहीं वैसा का वैसा रह गया हो आप देखेंगे किसी किसी की नाक में हड्डी बढ़ जाती है। आप देखेंगे किसी के शरीर में अमल्पित इतना होता है वो ठीक नही होता है । जिनको कभी रात में नींद नहीं आती ही नहीं ,बहुत सारे बच्चे एसे है जिनको चिलचिढ़ा पान होता है

शरीर को देखेंगे अविपत्तिचूर्ण, भिभिन प्रकार की जड़ी बूटी खा रहे है परंतु उनके शरीर से पित्त कम नहीं होता । शरीर में एक प्रकार की एक प्रकार की जलन होती है ।जैसे सीने की जलन, पेशाब की जलन , गुदद्वार का जलन आंख का जलन पेट में जलन यदि ऐसा रोग होता है एक ही औषधि है जब बरसात के मौसम छोटे छोटे बर्फ का टुकड़े को भीगते हुए लेकर तुरंत मुंह में भर लेना ।पिघल जाए तो फिर निगल जाना आपको एक सच्ची घटना बताता हु

Ola ka ayurvedic Upyog पर आधारित सच्ची घटना :-

एक बार एक व्यक्ति का एक्सीडेंट हो गया था ।हड्डियों का दर्द हो रहा था दांत और जबड़े भी दर्द हो रहा था( टाटा ऐसी) गाड़ी से पीछे एक्सीडेंट होने के वजह से दांत और जबड़े में चोट आ गई थी जिससे डेढ़ महीने भोजन नही कर पाए थे और दूध पीते थे। जल से कुल्ला करते थे दातुन नही कर पाते थे मुंह से बात नही कर पाते थे। जैसे वह बोलने करते थे गर्दन और मुंह में दर्द होने लगते थे। ऐसा मतलब डेढ़ महीना निकल गया एक बार वह सज्जन मुझसे मिले और वो कुछ लिखकर दिए।

ये ये बात है क्या आयुर्वेद में इसका कुछ नही है। आपका जब दुर्घटना हुआ तो आप एलोपैथिक में गए ही होंगे। सज्जन बोले 30000लगा लेकिन दांत को ठीक करने के लिए 30000और मांग रहे है लेकिन पैसा नहीं है आप आयुर्वेदिक चिकित्सा नही किया लेकिन आराम नही मिला बड़े बड़े चिकित्सक से मिला लेकिन आराम नही मिला मैं आपने मन सोचा जब इतने बड़े चिकित्सक का दावा खाकर आराम नही मिला मैं क्या कर सकता ।मैंने कहा 2से 5 दिन का टाइम दीजिए आपको आयुर्वेद ग्रंथो में मिलेगा बताता। फिर मैंने Ola ka ayurvedic Upyog के बारे में पढ़ा।

जब मैं आयुर्वेद में दांतो और हड्डियों के विषय में पढ़ था मुझे संतुष्ट नहीं मिला । मैं वर्षा के विषय भावप्रकास में पढ़ रहा था तो अचानक ओला का बारे में पता चला ओला का रूखापन होता है क्युकी उसमे वायु की प्रधानता होती है ये वायु को बढ़ा देता है। वात का गुण है रूखा होना आप देखेंगे जिसमे वायु कम होगा वो बोल नही पता साफ साफ नही सुनाई देता है। वहा पर वायु को बढ़ाना है

जब मैं देखा सही से बात नही कर पा रहे है खा नही पा रहे हैं कही पर आने जाने के लिए चक्कर आ जाता है। इसका मतलब है वायु कम हवा है वायु का गुण है विस्तार होना मतलब फैल होना ।और उनको दुर्बल लगना ये भी वायु के कम होने का कारण है। वायु का गुण होता है कुछ भी करने और बोलने की इच्छा होती है।

हम कोई मन्नत मांगते है वायु के कारण मांगते है यदि मन्नत पूरा हो जाएगा कोई धाम जाऊंगा गंगा मैया का दर्शन करने जाऊंगा या जगन्नाथ जाऊंगा। जब कोई मन्नत नही मांगता या कुछ करने की इच्छा नहीं होती है समझ लेना उसके अंदर वायु की कमी है स्थिर रहना शांत रहना दांत के मसूड़े का हिलना आदि वायु के कम होने से है कफ को बढ़ाता है वायु का बढ़ाता है लेकिन पित्त का नाश होता है। मैं समझने की कोशिश की, तब मुझे Ola ka ayurvedic Upyog के बारे में सही से पता चला।

यदिओला का सेवन करता है दांत मजबूत हो बजाएगा। दुर्बल खतम हो जायेगा पित्त का नाश होने पर उसके रक्त मांस मज़ा मेढ शुक्र ओज आदि बनाने लगते है जिससे सारा सारा रोग दूर हो जाएगा

मैंने उनको बोला आपको कही भी बरसात हो अगर उनके ओले मिले आप बरसात में भीगते हुए उनका सेवन करे चाहे सर्दी हो या जुकाम बुखार हो जितना ओला मिले निगल जाना है आपको आश्चर्य लगेगा ग्रीष्म ऋतु था जेष्ठ या आषाढ़ का महीना था आपने नाना के यहां गए थे जैसे ही उनके गांव में पहुंचे काले काले बादल छाने लगे कुछ समय बाद बारिश के साथ ओले गिरने लगा। उनको तो मैं कहा था जितना मिले आप ओले सेवन कर लेना ओले को मुंह में भरने जैसे ही पिघल जाए तो निगल लेते थे । और तीन चार ओला लिए मुंह में भर कर सो गए 1घंटे बाद जैसे उन्होंने आंखे खोली। चमत्कार हों गया।

उनका मुंह बंद नहीं हो रहा था बंद होने लगा और अच्छे बात भी करने लगे फिर उनको समझ में आया ये ओला का प्रभाव है ये घटना तीन वर्ष हो गए है अभी उनका न दांत दर्दनाही है पूरी तरह से ठीक है

जब किसी का वजन नही बढ़ता है जब बरसात के मौसम में ओले सेवन करने वजन बढ़ जाता है।आपने मुंह में भर ले जब पिघल जाए तो निगल जाना ओला स्थिर करता है बरसात में अन्न को छोड़ देना चाइए भरपेट ओला का सेवन करना चाहिए।

भावप्रकाश मिस्र लिखते है ओला का गुण एकदम शीतल होता है। कोई लोग yese होते है जब बात करते है उनके मुंह से आग निकलते है। आप देखेंगे दो व्यक्ति आपस में बात करते है कोई इसे व्यक्ति आता है । कुछ बोल देता है जिससे झगड़े होने लगते है। जैसे लोगो ओला सेवन करना चाहिए । जिनको शरीर में रक्त नही बनती है एनीमिया ,जिनको रक्त नही बनता है कफ का मात्रा नही होती है जिनको दांतो को मजबूत बनाना है वजन बढ़ाना है।

इसे नदी जो समुद्र में मिलता है जहा पर नदी और समुद्र मिलते है वहा का पानी में थोड़ा लवण और मीठा होता है। जिन लोगो का जांघ में दर्द होता है जिनको बार बार गलगंथ माला होता है जो तुषार का जल होता है थोड़ी थोड़ी मात्रा में पिलाना है। 4चम्माज डेली पिलाना है जल को संग्रह करके आप देखेंगे कंठ के जितने भी रोग होंगे वो सब दूर हो जाएंगे

Ola ka ayurvedic Upyog प्रयोग कैसे करें :-

  • जिनको प्रमेह मधुमेह रोग होता है समुद्र और नदी के जल को आप पियेंगे तो जिनका मधुमेह काम नहीं हो है। आप जो चूर्ण खाते है जामुन का बिज आप जो औषधि सेवन करते है उसके साथ साथ जल सेवन करने कंट्रोल आएगा
  • कुएं का जल शीतल होता है ग्रीष्म काल में ठंडी और शीत कल में गरम होता है।
  • यदि आप पतले दुबले होते है वहा पर कफ काम होता है आप वजन बहाना चाहते हो भोजन के बाद तुरान पानी पीना है

किन किन लोगो को ज्यादा पानी नही पीना चाहिए।

  • जिनका अग्नि मंद हों गया ।और उनको भूख नहीं लगती है बार बार पानी पियेंगे
  • जिनको थायराइड होता है उनको पाना काम पीना चाहिए
  • जिनको पांडू रोग है जिनको रक्त पनी बन जाता है कम पीना चाइए
  • जिनको ज्लोडर है उनको काम कम पानी पीना चाहिए
  • जिनको अतिसार है उनको कम मात्रा में पीना चाइए
  • जिनको ग्रहणी रोग है पानी थोड़ा कम मात्रा में पीना चिहिए कब्ज बनता है
  • जिनको बार बार प्यास लगता है उनको बार बार पानी नही देना चाहिए रंजक पित्त
  • शरद ऋतु और ग्रीष्म ऋतु में अधिक मात्रा में पीना चाहिए

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