पुरुष रोग चिकित्सा

पुरुष का महत्व (पुरुष रोग )आयुर्वेद एवं वेद आदि महाग्रंथो में शरीर को महापुरुष कहा गया है जिसमें पंचमहाभूत, इंद्रियां आदि है और उसके साथ जीवात्मा प्रवेश करता है ,तब उनको पुरुष कहा गया है पुरुष शब्द से जाती भेद नहीं जाने । नर ,नारी और नपुंसक तीनों जाति पृथ्वी पर हैं, उन तीन को … Read more

प्राकृतिक चिकित्सा

इस संसार में करोड़ों प्राणी और जीव जंतु ऐसे हैं .जो बिना दवा खाए अपने रोग m ittaसकते है |और और अपनी जाति के खाने योग्य भोजन खाकर निरोग रहते हैं; वह केवल निरोगी ,नहीं बल्कि अपने शरीर में उत्तम बल और शक्ति भी पैदा कर लेते हैं1 इसके लिए अपने को बुद्धिमान समझने वाला … Read more

आधा शीशी

हमारे शरीर के उत्त मांगो मांगों में मस्तिक प्रधान अंग है, और इसके शिर शूल, सूर्या वर्त अनंतवात मस्तक पीड़ा भ्रू पीड़ा प्रतिशय सन्निपात तथा मानसिक दुर्बलता आदि कठिन रोगों में ग्रस्त हो जाने से हमारे जीवन का सारा कार्य शिथिल पड़ जाता है और साथ ही भयंकर पीड़ा भी सहन करनी पड़ती है अतः … Read more